Lyrics in hindi
स्थाई - लागी रे लगनियां मोहन सो, सुन्दर बदन कमल दल लोचन नन्द जी के छैल चिकनियां। अन्तरा- कछु टोना सा डारि दियो है, कैसे भरु मैं जाय पनिया, कृष्णदास को बेगि मिलोगे कब, निरखत रुप की धनियां। (यह कविता भगवान श्रीकृष्ण की सुंदरता और आकर्षण का वर्णन करती है। कविता में श्रीकृष्ण के सुंदर बदन, कमल जैसी आंखें और चिकनी त्वचा का उल्लेख है। कविता की शैली और भाषा भक्ति कविताओं और लोकगीतों की परंपरा से जुड़ी हुई है, जिसमें भगवान की महिमा और सुंदरता का वर्णन किया जाता है। कविता में श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम की भावना को व्यक्त किया गया है।)
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Lyrics in gujrati
સ્થાઈ - લાગી રે લગનિયાં મોહન સો, સુન્દર બદન કમલ દલ લોચન નન્દ જી કે છૈલ ચિકનિયાં। અન્તરા- કછુ ટોના સા ડારિ દિયો હૈ, કૈસે ભરુ મૈં જાય પનિયા, કૃષ્ણદાસ કો બેગિ મિલોગે કબ, નિરખત રુપ કી ધનિયાં।
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Lyrics in english
STHAI:- Lagi re laganiyan Mohan so, sundar badan kamal dal lochan Nand ji ke chhail chikniyan. ANTRA:- Kachu tonaa sa dari diyo hai, kaise bharu main jaay paniya, Krishnadas ko begi miloge kab, nirakhath rup ki dhaniyan.
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