Lyrics in hindi
स्थाई :- सप्त सुरन बरन विकुती द्वादस मध्यम साधारन खरज कलितका कली sur साधे गुनी गाये, स...। अंतरा :- मेरु सुर प्रास्तर नेष्टदेष्ट पंगत अलंकार रोही अवरोही साग मरे सासा नीधनी सुध बानी गाए , स...। संचारी :- द्वितीय त्रुपीय मध्यम पंचम धैवत निखा दादीक उलट पुलट लाए। अभोग :- चेत बिधि बनाए, स..... । (भावार्थ: स्थाई: सात स्वरों के विभिन्न रंगों में द्वादश मध्यम की साधारणता और खरज की कलितका कली को गुणी कवि स्वर साधकर गाते हैं. अंतरा: मेरु सुर की प्रस्तारित पंक्ति में अलंकारों की रोही और अवरोही गति से मेरी सांसें निधनी सुध बानी में गाए जाती हैं. संचारी: द्वितीय, तृतीय, मध्यम, पंचम और धैवत स्वरों की निखाली और दादिक गति से उलट-पुलट लाए जाते हैं. अभोग: चेत की विधि से बनाए जाते हैं, स. यह कविता संगीत के विभिन्न तत्वों और रागों के बारे में बात करती है, जिसमें कवि ने संगीत के विभिन्न पहलुओं को बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णित किया है।)
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Lyrics in gujrati
સ્થાઈ :- સપ્ત સુરન બરન વિકુતી દ્વાદસ મધ્યમ સાધારન ખરજ કલિતકા કલી sur સાધે ગુની ગાયે, સ...। અંતરા :- મેરુ સુર પ્રાસ્તર નેષ્ટદેષ્ટ પંગત અલંકાર રોહી અવરોહી સાગ મરે સાસા નીધની સુધ બાની ગાએ , સ...। સંચારી :- દ્વિતીય ત્રુપીય મધ્યમ પંચમ ધૈવત નિખા દાદીક ઉલટ પુલટ લાએ। અભોગ :- ચેત બિધિ બનાએ, સ..... ।
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Lyrics in english
STHAI: Sapt suran barna vikuti dwadas madhyam sadharan kharaj kalitaka kali, sur sadhe guni gaye, sa. ANTARA: Meru sur prashtar nestadest pankati alankar rohi avarohi sag mare saasa nidhani sudh bani gaye, sa. SANCHARI: Dwitiya trupiya madhyam pancham dhaivat nikha dadik ulat pulat lae. ABHOG: Chet bidhi banaye, sa.
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